Original Real Photo Of Chhatrapati Shivaji Maharaj with Signature

Original Photo Of Chhatrapati Shivaji Maharaj with Signature

Original Photo Of Chhatrapati Shivaji Maharaj with Signature
Original Photo Of Chhatrapati Shivaji Maharaj with Signature


Chitramay Shivrajyabhishek



Chitramay Shivarajyabhishek Dr. Uday Nirgudkar and Babasaheb Purandare on zee 24 Taas

























चरित्रवान..छत्रपति...शिवाजी

छत्रपति शिवाजी महाराज जितने तलवार के धनी थे, उतने ही धनी चरित्र के भी थे। अपनी तलवार और चरित्र को उन्होंने कभी दागदार नहीं होने दिया।

एक बार शिवाजी के एक वीर सेनापति ने कल्याण का किला जीता। हथियारों के जखीरे के साथ-साथ अकूत संपत्ति भी उसके हाथ लगी।
एक सैनिक ने मुगल किलेदार की परम सुंदर बहू को उसके समक्ष पेश किया। वह सेनापति उस नवयौवना के सौंदर्य पर मुग्ध हो गया और उसने शिवाजी को नजराने के रूप में उसे भेंट करने की ठानी। उस सुंदरी को एक पालकी में बिठाकर वह शिवाजी के पास पहुंचा।

शिवाजी उस समय अपने सेनापतियों के साथ शासन-व्यवस्था के संबंध में बातचीत कर रहे थे।

उस सेनापति ने शिवाजी को प्रणाम किया और कहा कि वह कल्याण में प्राप्त एक सुंदर चीज उन्हें भेंट करना चाहता है। यह कह कर उसने एक पालकी की ओर इंगित किया।
शिवाजी ने ज्यों ही पालकी का पर्दा उठाया तो देखा कि उसमें एक खूबसूरत मु‌गल नवयौवना बैठी हुई है।

उनका शीश लज्जा से झुक गया और उनके मुख से सहसा ये शब्द निकले - 'काश! हमारी माता भी इतनी खूबसूरत होतीं तो मैं भी खूबसूरत होता।'

इसके बाद अपने सेनापति को डांटते हुए शिवाजी ने कहा - 'तुम मेरे साथ रहकर भी मेरे स्वभाव को नहीं जान सके? शिवाजी दूसरे की बहू-बेटियों को अपनी माता की तरह मानता है। अभी जाओ और ससम्मान इन्हें इनके घर पहुंचा के आओ।
सेनापति को काटो तो खून नहीं। कहां तो वह अपने को इनाम का हकदार समझ रहा था और नसीब हुई तो सिर्फ फटकार। लेकिन मुगल किलेदार की बहू को उसके घर पहुंचाने के अलावा सेनापति के पास चारा ही क्या था।

मन ही मन उसने शिवाजी के चरित्र को सराहा और उस मुगल नवयौवना को उसके घर पहुंचाने के लिए वहां से चल पड़ा।


शिवाजी महाराजकी गुरु भेंट
          समर्थ रामदास स्वामीजीकी ख्याति सुननेपर छ.शिवाजी महाराजको उनके दर्शनकी लालसा निर्माण हुई । उनसे मिलनेके लिए वे कोंढवळको गए । वहां भेट होगी इस आशासे सायंकालतक रुके, तब भी महाराजकी स्वामीजीसे भेंट नहीं हुई । तत्पश्चात प्रतापगढ आनेपर रातमें नींदमें भी महाराजके मनमें वही विचार था । समर्थ रामदास स्वामीजी जानबूझकर महाराजसे मिलना टाल रहे थे । ऐसे ही कुछ दिन निकल जानेपर एक दिन समर्थजीके दर्शनकी लालसा अत्यधिक बढनेसे वे भवानीमाताके मंदिरमें गए । उस रात वे वहांपर ही देवीके सामने निद्राधीन हो गए ।  रातमें स्वप्नमें उन्हें पैरमें  खडांऊ, देहपर भगवा वस्त्र, हाथमें माला, बगलमें कुबडी ऐसे तेजस्वी रूपमें समर्थ रामदास स्वामीजीके दर्शन हुए । छ. शिवाजी महाराजने उन्हें साष्टांग नमस्कार किया । समर्थजीने उनके सिरपर हाथ रखकर उन्हें आशिर्वाद दिया । नींदमेंसे जागनेपर महाराजने देखा तो उनके हाथमें प्रसादके रूपमें नारियल था ।  उस समयसे वे समर्थ रामदास स्वामीजीको अपने गुरु मानने लगे ।
       आगे छ. शिवाजी महाराजने अत्यधिक पराक्रम करनेपर समर्थ रामदास स्वामीजीने स्वयं शिंगणवाडी प्रत्यक्ष आकर महाराजको दर्शन दिए । महाराजने उनकी पाद्यपूजा की । समर्थजीने उन्हें प्रसाद के रूपमें एक नारियल, मुठ्ठीभर माटीr, लीद एवं पत्थर दिए । उस समय महाराजके मनमें आया कि़, ‘हमें राज्यकारभारका त्याग कर समर्थजीकी सेवा करनेमें शेष आयु लगानी  चाहिए । समर्थजी महाराजके मनका यह विचार समझ गए और उन्होंने कहा ‘राजा, क्षत्रिय धर्मका पालन कीजिए । प्राण जानेपर भी धर्मका त्याग न करें । प्रजाके रक्षणके लिए तुम्हारा जन्म हुआ है, वह छोडकर यहां सेवा करनेके लिए न रहें । मेरा केवल स्मरण करनेपर भी मैं आपसे मिलने आऊंगा । सुखसे, आनंदसे राज्य कीजिए' । तत्पश्चात् समर्थजीने उन्हें राज्य करनेकी आदर्श पद्धति समझाई । समर्थजीने महाराजको उनके कल्याणके लिए नारियल दिया था । सर्वथा संतुष्ट एवं तृप्त मनसे छ. शिवाजी महाराज राज्य करने लगे । महाराजने माटी अर्थात पृथ्वी, पत्थर अर्थात गढ जीता एवं लीद अर्थात अश्वदलसे भी समृद्ध हो गए । गुरुके कृपाप्रसादसे महाराजको किसी वस्तुका अभाव नहीं रहा ।
        छ. शिवाजी महाराजने विदेशी शत्रुओंका नाश करके स्वराज्यकी स्थापना करनेका जो कार्य आरंभ किया था उसपर समर्थजीको अत्यधिक अभिमान था ।  वे लोगोंको छत्रपतीजीके कार्यमें सहायता करने तथा शक्ति संपादन करके स्वराज्य एवं धर्मरक्षणके लिए लडनेका उपदेश करते थे ।  छ. शिवाजी महाराजकी समर्थजीके प्रति अत्यधिक श्रद्धा थी । अनेक प्रसंगोंमें महाराज समर्थ रामदास स्वामीजीका विचार एवं आशिर्वाद लेते थे । आपत्कालमें हमें सतर्कता कैसे बरतना चाहिए, इस संदर्भमें समर्थजाद्वारा छ. शिवाजी महाराजको दिया गया उपदेश ‘दासबोध' नामक ग्रंथमें  है । उसमें समर्थजी कहते हैं, ‘सदैव सतर्कतासे रहकर आचरण करें, शत्रु-मित्रको ठीकसे परखें, एकांतमें अत्यधिक विचार कर योजना बनाएं, निरंतर प्रयास करते रहें । इसके पूर्व अनेक महान लोग हो गए, उन्होंने अत्यधिक बुरी स्थिति तथा कष्ट सहन किए हैं । आलसका त्याग कर, बिना कष्टके अनेक लोगोंसे मित्रता करके कार्य करते रहें’।
        बालमित्रो, छ. शिवाजी महाराजको समर्थ रामदासस्वामीजीसे मिलनेकी लालसा थी । उनकी तीव्र उत्कंठासे उन्हें स्वप्नमें एवं तदुपरांत प्रत्यक्ष समर्थ रामदास स्वामीजीके दर्शन हुए । उत्कंठासे हम किसी भी लक्ष्यको साध्य कर सकते हैं ।

 शिवाजी को गुरु का संदेश
 जब छत्रपति शिवाजी को यह पता चला कि समर्थ रामदासजी ने महाराष्ट्र के ग्यारह स्थानों में हनुमानजी की प्रतिमा स्थापित की है और वहाँ हनुमान जयंती उत्सव मनाया जाने लगा है, तो उन्हें उनके दर्शन की उत्कृष्ट अभिलाषा हुई। वे उनसे मिलने के लिए चाफल, माजगाँव होते हुए शिगड़वाड़ी आए। वहाँ समर्थ रामदासजी एक बाग में वृक्ष के नीचे "दासबोध" लिखने में मग्न थे।

शिवाजी ने उन्हें दंडवत प्रणाम किया और उनसे अनुग्रह के लिए विनती की। समर्थ ने उन्हें त्रयोदशाक्षरी मंत्र देकर अनुग्रह किया और "आत्मानाम" विषय पर गुरुपदेश दिया (यह "लघुबोध" नाम से प्रसिद्ध है और "दासबोध" में समाविष्ट है।) फिर उन्हें श्रीफल, एक अंजलि मिट्टी, दो अंजलियाँ लीद एवं चार अंजलियाँ भरकर कंकड़ दिए।

जब शिवाजी ने उनके सान्निध्य में रहकर लोगों की सेवा करने की इच्छा व्यक्त की, तो संत बोले- "तुम क्षत्रिय हो, राज्यरक्षण और प्रजापालन तुम्हारा धर्म है। यह रघुपति की इच्छा दिखाई देती है।" और उन्होंने "राजधर्म" एवं "क्षात्रधर्म" पर उपदेश दिया।

शिवाजी जब प्रतापगढ़ वापस आए और उन्होंने जीजामाता को सारी बात बताई, तो उन्होंने पूछा- "श्रीफल, मिट्टी, कंकड़ और लीद का प्रसाद देने का क्या प्रयोजन है?" शिवाजी ने बताया- "श्रीफल मेरे कल्याण का प्रतीक है, मिट्टी देने का उद्देश्य पृथ्वी पर मेरा आधिपत्य होने से है, कंकड़ देकर यह कामना व्यक्त हो गई है कि अनेक दुर्ग अपने कब्जे में कर पाऊँ और लीद अस्तबल का प्रतीक है, अर्थात उनकी इच्छा है कि असंख्य अश्वाधिपति मेरे अधीन रहें।" इस प्रकार राजधर्म को समझकर शिवा ने अपनी शक्ति का विस्तार किया और न्याय नीति की स्थापना की।
Original Photo Of Chhatrapati Shivaji Maharaj with Signature
Original Photo Of Chhatrapati Shivaji Maharaj with Signature

Ganimi Kawa


 Picture 
Hyderabad, asked during the discussion of such a thing did the Maratha person jhalitya discussion with one person, want to attack the Marathas hidden? To flee the field? The Marathas were brigand? He said that would come to her that we have heard about you, and want to hide chapunaca charge to flee away, afraid to come to the Marathas in the open field.

I was not angry at all, because they speak of our country ... lost
I told the neighbor to hide in case of attack by a person ahetatya spread superstition Maratha history of the spread of many such tya, acanakapane surprise to shock, to get some success against sampavine Stand In the poetry section hotaani Maratha guerrilla Guerrilla warfare is to bring at least one military Kami way.

Prattyeka man seemed important for our life to the king. Although it makes some individuals were Marathas, the Marathas as the mhanayacatyamule I was in Hyderabad to take him straight to his haidarabadceca example diletyala said chasivaji Maratha king named his huge army.

It was the king's visit to your house without any bodyguards with leave Golconda Fort in your army, and then giving you a month was the king was afraid, because the plan was made as a king of the Maratha phaujene Hyderabad ended did not see.

When your troubled by the grace of the king chasivarayanna request was huge king what you saw when jhalesuddhaapalechatrapati hoteevadheca Marathas was quiet as quiet karaani your army, fearful elephant named Yesaji kanka ekatyaneca sampavila always better and that had proved an elephant's strength was in the field of open war which the Maratha asatoudagiricyaladhaita.

Ibrahim Baran same battle as gunnery chief was killed in front of asatannasuddha how Mughals, the Marathas 40000 80000 open field of battle hotesvalhera won maratheca tophkhanyasaha little of it is, you know? And which country he fell foil Aurangzeb completed his aurangyala same hall afraid, chest stretch, rigid Maanen out to be the king marathaca hotaani when sitting in the tail, and all the warriors.

When the house went to Kos from 800 collision aphagananna open field away and planted payment Baji said that marathyannica ............ ........ when it was a little quiet would have said what strip ?

I said to him, Marathas plundered their treasures his king, took away the enemy, and his self-confidence and pride not robbed setakarayala like never adhikaramarathyanni parisaravaraca that, like the common man is not harassed, never joined any woman lying ..... It was not the way to speak to him .......... ............ called you friends Answer is also asked you if anyone ......... Jai Maharaj's chasivaji. .


हैदराबादच्या एका व्यक्ती सोबत मराठ्यांच्या पराक्रमांवर चर्चा झाली.त्या व्यक्तीने चर्चेदरम्यान एक गोष्ट अशी विचारली की,मराठे लपून हल्ला करायचे का? मैदानातून पळून जायचे का? मराठे लुटारू होते का? तो म्हणाला की आम्ही असे ऐकले आहे की मराठे लपूनछपून यायचे,लपून छपूनच हल्ला करायचे आणि लुटून पळून जायचे,खुल्या मैदानात मराठे यायला घाबरायचे.

मला त्याच्या बोलण्याचा अजिबात राग आला नाही कारण आपल्या देशात ...खो

ट्या इतिहासाच्या प्रसाराने अशा बऱ्याच अंधश्रद्धा मराठ्यांच्या बाबतीत पसरल्या आहेत.त्या व्यक्तीला मी सांगितले की लपून छपून हल्ला करून,अचानकपने आश्चर्याचा धक्का देणे, काही कळायच्या आत शत्रूला संपविणे हा मराठ्यांच्या गनिमी काव्याचा भाग होता.आणि गनिमी कावा हा कमीत कमी सैन्य कामी आणून यश मिळविण्याचा एक मार्ग होता.

कारण प्रत्त्येक सैनिकाचा जीव महत्वाचा वाटायचा आमच्या राजाला. तरी तो व्यक्ती काहीना काही म्हणून मराठे असे होते,मराठे तसे होते असा म्हणायचा.त्यामुळे मी त्याला सरळ त्याच्या हैदाराबाद्चेच उदाहरण दिले.त्याला सांगितले की छ.शिवाजी महाराज नावाचा मराठा आपली अवाढव्य फौज घेऊन हैदराबाद मध्ये आला होता.


ती फौज तुमच्याच गोलकोंडा फोर्टमध्ये तशीच सोडून कोणताही अंगरक्षक सोबत न घेता तुमच्याच राजाच्या घरात भेटीसाठी गेला होता,महिनाभर राहिला आणि अशावेळी तुमचाच राजा घाबरला होता,कारण आपला राजा दिसत नाही म्हणून मराठा फौजेने हैदराबाद संपविण्याची योजना बनविली होती.


तेव्हा घाबरून तुमच्याच राजाने छ.शिवरायांना विनंती केली होती की कृपा करून आपल्या सैन्याला शांत करा.आणि तसे झालेसुद्धा.आपलेछत्रपती दिसले तेव्हा मराठे शांत झाले होते.एवढेच काय तुमच्या राजाचा अवाढव्य,भयावह हत्ती येसाजी कंक नावाच्या मराठ्याने एकट्यानेच संपविला होता आणि सिद्ध केले होते की एक मराठा हत्तीच्या ताकदीचा असतो.उदगिरीच्यालढाईत जी लढाई खुल्या मैदानात झाली होती.


त्याच लढाईत इब्राहीम गार्दी सारखा तोफखान्याचा प्रमुख समोर असतांनासुद्धा थोड्याशा तोफ्खान्यासह मराठेच जिंकले होते.स्वाल्हेरच्या लढाईत खुल्या मैदानात ४०००० मराठ्यांनी ८०००० मुघलांना कसे कापले होते हे तुम्हाला माहिती आहे का?आणि ज्या औरंगजेबाला पूर्ण देश घाबरायचा त्याच औरंग्याला त्याच्याच दरबारात हाणून पडून बोलून, छाती ताणून ,ताठ मानेन निघून जाणारा राजा मराठाच होता.आणि जेव्हा देशातील सर्व शूरवीर शेपूट घालून बसले होते.


तेव्हा घरापासून ८०० कोस दूर खुल्या मैदानात अफगानांना टक्कर द्यायला निघाले आणि जीवाची बाजी लावली ती मराठ्यांनीच............असे म्हटल्यावर तो जरा गप्प राहिला........तरी म्हणाला की लुटायची काय गरज असायची?


मी त्याला म्हणालो की,मराठ्यांनी लुटली ती त्या त्या राजाची संपत्ती,लुटला शत्रूचा आत्मविश्वास आणि अहंकार आणि त्याचा त्या परीसरावरचा अधिकार..मराठ्यांनी कधीही कोण्या शेतकरयला लुटले नाही,कोण्या सामान्य माणसाला त्रास दिला नाही,कधीही कोणत्याही स्त्रीची अब्रू लुटली नाही.................असे म्हटल्यावर त्याला बोलायला मार्ग राहिला नाही..........मित्रांनो तुम्हाला जर कुणी असे विचारले तर तुम्ही सुद्धा हेच उत्तर द्या...........छ.शिवाजी महाराज की जय. .

Rajasthani wanted Shivaji in their state


This event is about two years ago while working as a tour manager I am on the fort in Rajasthan the King of the church, along with the Yadav Bhatti my darshan location of Jaisalmer. This fort is the only and only yellow Mud dagadatuna sakaralela amazing. Havelya, ornamental jharoke all very cool how that Rao danaka f ....The temperature was near the summer as give some cool cool all the sweat many were in the house of 40, I made a suggestion to that do the church there was misyanca Handlebar Rajput Bhatti one went into the hotel work shops tea in a small and pretty devharyata pretty on the wall behind rajaputa of But only the top of your chest and Chhatrapati flouriest and asked them to work and know you? And Mr. Yogi, and claimed a wicket full now kept in front of the king Chhatrapati Sambhaji all books you read but how to know when his son is living in Mumbai, he said. Marathi understand him when he takes his grandson is medium comes vacations village. Bhatti's photo was on him, but I spoke to atmiyatene that they asked their name and history, but in the end said one sentence'Sivaji Maharaj, as if he was a king in Jaisalmer Jaisalmer from this pakistanaki border 100 km to 1000 km away, it is not generally, you give the maharaja Raigad respect my jacket for me that it came from my in this holy state'And that person was caught I was pretty feet of water in his eyes, but took hold.Blessed are they Shivaraya


साधारण दोन वर्षांपूर्वीची हि घटना आहे .मी राजस्थानमध्ये tour manager म्हणून काम करत असताना मी जैसलमेरच्या स्थळ दर्शनासाठी माझ्या सोबत असलेल्या मंडळीना घेऊन यादव भाटी राजाच्या किल्ल्यावर आलो . पिवळ्या मुरूम दगडातून साकारलेला हा किल्ला म्हणजे केवळ आणि केवळ अप्रतिम आहे . हवेल्या , नक्षीदार झरोके सगळे कसे एकदम मस्त .दणका च कि राव ....
उन्हाळा जवळ आला होता तापमान ४० च्या घरात होते अनेक जण घामाघूम झाले सगळ्यांना मस्त थंड काही द्यावे म्हणून मी एका छोट्या चहा टपरी काम हॉटेल मध्ये गेलो एक भाटी राजपूत पिळदार मिश्यांचा तेथे होता मंडळीना जे हवे ते घेण्याची सूचना केली आणि त्या राजपुताच्या मागे भिंतीवर चक्क देव्हार्यात चक्क केवळ आणि केवळ आपले छत्रपती विराजमान होते मग छाती फुलली आणि त्यास विचारले आपणास माहित आहे का यांचे कार्य ? त्याने श्रीमान योगी , राजा शिवछत्रपती आणि संभाजी सगळी पुस्तकेच समोर ठेवली आता तर फुल विकेट उडाली पण आपण वाचले पण समजले कसे तेव्हा तो म्हणाला त्याचा मुलगा मुंबईत राहायला आहे . त्यांचा नातू मराठी माध्यमात जातो तो जेव्हा सुट्टीत गावी येतो तेव्हा त्याच्याकडून समजावून घेतो . त्याच्याच बाजूला भाटी राजाचा पण फोटो होता मी त्यांचे नाव आणि इतिहास विचारला त्यांनी तो आत्मीयतेने सांगितला पण शेवटी एकाच वाक्य म्हणाले
'' सिवाजी महाराज जैसा अगर एक भी राजा जैसलमेर मे होता तो आज जैसलमेर से पाकिस्तानाकी सीमा १०० किमी नाही तो १००० किमी दूर रेहती , आप महाराष्ट्र से आये हे जो मेरे लिये वंदनीय हे ये मेरा प्रणाम रायगड जाके मेरे महारज को दे देना ''
आणि त्या व्यक्तीने चक्क पाय पकडले मी पकडून उचलले तर त्याच्या डोळ्यात पाणी आले होते .
धन्य ते शिवराय

Shivaji Maharaj mentioned 'London Gazette' newspaper



The most important event in the history of Surat them with news of Britain 'London Gazette' this newsletter Category The information that was published in 1672, gave a press conference on Wednesday in history scholar Sayali palande-Datar. Maharaj said he found the English newspaper mentioned for the first time.
Original Photo of Great Shivaji Maharaj - A Indian Maratha King


History of the book in the context of research Gajanan Mehendale 'Book News' The thought being that will be mentioned palande other newspapers reported the happenings of the time-Datar plan to research on this topic today. He studied in London with the British side of the references that are available at the library's board recommended the revision history of India. London gadgets on Sunday, February 17 is printed on the first page of the Thursday, 20 February 1672 edition news Surat them. In those days there was a different kind of existence for seven-eight newspapers in London. Among them was the famous London Gazette newspaper sarakaratapher. It is not known about the news. Newspapers cognizance was taken of the most important happenings of the world. The main source of news, government documents, letters that palande-Datar said.

Surat Surat them the news that Governor alepo has written a letter to the British government. This Maharaj 'sevagee the rebel' is mentioned in the offensive. Mughal empire has lost control of many rumors in the country that we all fear, that alepo said in the letter. British before the port is a secure place for business yeethe getting possession on Mumbai, the information in this letter was to be palande-Datar said.

Then the points mentioned in this newspaper Shivaji Maharaj 'kings', 'Sir', 'Prince' and 'Raya' that was to be palande-Datar said.

War and settled by the Portuguese in Cochin Aurangzeb gadgets to charge in London, Aurangzeb and was taken note of Saturday's battle. Surat letter seems to have been made by the British or sutovaca migration. This is an important document in the history of the research will continue in palande-Datar said.

इतिहासातील महत्त्वाची घटना असणाऱ्या सूरत लुटीची बातमी ब्रिटनच्या 'लंडन गॅझेट' या वृत्तपत्रातून इ.स. १६७२ मध्ये छापून आली असल्याची माहिती इतिहासाच्या अभ्यासक सायली पाळंदे-दातार यांनी बुधवारी पत्रकार परिषदेत दिली. महाराजांचा इंग्रजी वृत्तपत्रात प्रथमच उल्लेख सापडला असल्याचे त्यांनी सांगितले.

इतिहास संशोधक गजानन मेहेंदळे यांच्या पुस्तकातील संदर्भात 'न्यूज बुक' असा उल्लेख असल्याने त्या काळच्या इतर घडामोडींची नोंद वृत्तपत्रांतून असणार या विचाराने पाळंदे-दातार यांनी या विषयावर संशोधन करायचे ठरवले. त्यासाठी त्यांनी भारत इतिहास संशोधन मंडळाच्या शिफारस पत्राच्या मदतीने लंडन येथील ब्रिटीश लायब्ररीत उपलब्ध असणाऱ्या संदर्भांचा अभ्यास केला. लंडन गॅझेटच्या रविवार, १७ फेब्रुवारी ते गुरुवार २० फेब्रुवारी १६७२ च्या अंकात सूरत लुटीची बातमी पहिल्या पानावर छापली आहे. लंडनमध्ये त्याकाळी निरनिराळ्या प्रकारची सात-आठ वृत्तपत्रे अस्तित्त्वात होती. त्यापैकी लंडन गॅझेट हे वृत्तपत्र सरकारतफेर् प्रसिद्ध होत असे. यात साधारण बातम्या प्रसिद्ध होत नसत. जगभरातील महत्त्वाच्या घडामोडींची दखल वृत्तपत्रातून घेतली जात असे. बातम्यांचे मुख्य स्त्रोत सरकारी दस्ताऐवज, पत्रे असल्याचे पाळंदे-दातार यांनी सांगितले.

सूरत लुटीची बातमी म्हणजे सूरतचे गव्हर्नर अलेपो यांनी ब्रिटीश सरकारला लिहिलेले पत्र आहे. यात महाराजांचा 'sevagee the rebel' असा आक्षेपार्ह उल्लेख केला आहे. संपूर्ण देशावर नियंत्रण असलेल्या मुघल साम्राज्याला अनेक लढायांमध्ये हरवले असून आम्हालाही याची भिती वाटते, असे अलेपो यांनी या पत्रात म्हटले आहे. ब्रिटीशांसाठी मुंबई हे ठिकाण सुरक्षित असून यावर ताबा मिळवून येेथे व्यवसायासाठी बंदर उभे करावे, अशी सूचना या पत्रात करण्यात आली असल्याचे पाळंदे-दातार म्हणाल्या.

या वृत्तपत्राच्या नंतरच्या अंकांमध्ये शिवाजी महाराजांचा उल्लेख 'राजे', 'महाराज', 'प्रिन्स' आणि 'राया' असे करण्यात आले असल्याचे पाळंदे-दातार यांनी नमूद केले.

लंडन गॅझेटमध्ये औरंगजेबाने कोचीनच्या ताबा घेण्यासाठी पोर्तुगीज आणि डचांशी केलेली लढाई, औरंगजेब आणि संभाजी यांच्या युद्धाची दखल घेण्यात आली आहे. सूरतहून ब्रिटीशांनी केलेल्या स्थलांतराचे सुतोवाच या पत्रातून केले गेल्याचे दिसते. इतिहासाच्या दृष्टीने हा महत्त्वाचा दस्ताऐवज असून यात पुढे संशोधन करणार असल्याचे पाळंदे-दातार यांनी सांगितले.